apna ujjain(अपना उज्जैन)



 उज्जैन भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर है जो क्षिप्रा नदी या शिप्रा नदी के किनारे पर बसा है। यह एक अत्यन्त प्राचीन शहर है। यह महान सम्राट विक्रमादित्य के राज्य की राजधानी थी । उज्जैन को कालिदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ हर 12 वर्ष पर सिंहस्थ महाकुंभ मेला लगता है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल इस नगरी में स्थित है। उज्जैन मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इन्दौर से 45 कि॰मी॰ पर है। उज्जैन के प्राचीन नाम अवन्तिका, उज्जयनी, कनकश्रन्गा आदि है। उज्जैन मंदिरों की नगरी है। यहाँ कई तीर्थ स्थल है। इसकी जनसंख्या 515215 लाख सन ,2011 की जनगणना के हिसाब से है। यह मध्य प्रदेश का पाँचवा सबसे बड़ा शहर है। नगर निगम सीमा का क्षेत्रफल 152 वर्ग किलोमीटर            
राजनैतिक इतिहास उज्जैन का काफी लम्बा रहा है। उज्जैन के गढ़ क्षेत्र से हुयी खुदाई में आद्यैतिहासिक (protohistoric) एवं प्रारंभिक लोहयुगीन सामग्री प्रचुर मात्रा में प्राप्त हुई है। पुराणों व महाभारत में उल्लेख आता है कि वृष्णि-वीर कृष्ण व बलराम यहाँ गुरु सांदीपनी के आश्रम में विद्याप्राप्त करने हेतु आये थे। कृष्ण की एक पत्नी मित्रवृन्दा उज्जैन की ही राजकुमारी थी। उसके दो भाई विन्द एवं अनुविन्द महाभारत युद्ध में कौरवों की और से युद्ध करते हुए वीर गति को प्राप्त हुए थे। ईसा की छठी सदी में उज्जैन में एक अत्यंत प्रतापी राजा हुए जिनका नाम चंड प्रद्योत था। भारत के अन्य शासक उससे भय खाते थे। उसकी दुहिता वासवदत्ता एवं वत्सनरेश उदयन की प्रणय गाथा इतिहास प्रसिद्ध है प्रद्योत वंश के उपरांत उज्जैन मगध साम्राज्य का अंग बन गया।
उज्जैन भारत के मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर है जो क्षिप्रा नदी या शिप्रा नदी के किनारे पर बसा है। यह एक अत्यन्त प्राचीन शहर है। यह महान सम्राट विक्रमादित्य के राज्य की राजधानी थी । उज्जैन को कालिदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ हर 12 वर्ष पर सिंहस्थ महाकुंभ मेला लगता है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल इस नगरी में स्थित है। उज्जैन मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर इन्दौर से 45 कि॰मी॰ पर है। उज्जैन के प्राचीन नाम अवन्तिका, उज्जयनी, कनकश्रन्गा आदि है। उज्जैन मंदिरों की नगरी है। यहाँ कई तीर्थ स्थल है। इसकी जनसंख्या 515215 लाख सन ,2011 की जनगणना के हिसाब से है। यह मध्य प्रदेश का पाँचवा सबसे बड़ा शहर है। नगर निगम सीमा का क्षेत्रफल 152 वर्ग किलोमीटर है। दर्शनीय स्थल चिन्तामन गणेश स्थिरमन गणेश गढ़कालिका माताजी हरसिद्धि माताजी कालभैरव देव महाकालेश्वर महादेव सिद्धनाथ वट मंगलनाथ देव अंगारेश्वर महादेव राम घाट चक्रतीर्थ गणेश रामजानकी मन्दिर अक्रुरेश्वर महादेव विष्णु सागर पुरुषोत्तम सागर मार्कंद्देशवर महादेव ग्याकोटा महादेव चारधाम मन्दिर विक्रांत भैरव ओखलेश्वर महादेव गोपाल मन्दिर भर्तुहरि गुफा सिंहेश्वर मन्दिर वैभवलक्ष्मी मन्दिर हनुमतेश्वर मन्दिर भूखीमाता मन्दिर विष्णु चतुष्टिका छत्रेश्वरी चामुण्डा माताजी संदीपनी आश्रम चयवनेश्वर महादेव गुमानदेव हनुमान मन्दिर
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(उज्जैन मानचित्र)

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(उज्जैन दर्शनीय स्थल)

lमहाकालेश्वर मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित, महाकालेश्वर भगवान का प्रमुख मंदिर है। पुराणों, महाभारत और कालिदास जैसे महाकवियों की रचनाओं में इस मंदिर का मनोहर वर्णन मिलता है। स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव की अत्यन्त पुण्यदायी महत्ता है। इसके दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है, ऐसी मान्यता है। महाकवि कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी की चर्चा 

काल भैरव मंदिर

काल भैरव मंदिर, उज्जैन स्थित एक हिन्दू मंदिर है जो कि भगवान काल भैरव को समर्पित है। यह महाकाल मंदिर से लगभग पाँच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह दुनिया का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां पर भगवान भैरवनाथ पर मदिरा का चढ़ावा चढ़ाया जाता है । आपको इस मंदिर के बाहर में सभी सामग्री मिल जाएगी । इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको उज्जैन से हर संभव सहायता मिल जाएगी । बस ,टैक्सी ,मिल जाती हैं ।मंदिर परिसर बहुत ही अच्छा है.

 हरसिद्धि देवी

देशभर में हरसिद्धि देवी के कई प्रसिद्ध मंदिर है लेकिन वाराणसी और उज्जैन स्थित हरसिद्धि मंदिर सबसे प्राचीन है। आओ जानते हैं माता हरसिद्धि देवी के मंदिर का इतिहास और महत्व।उज्जैन में महाकाल क्षेत्र में माता हरसिद्धि का प्राचीन मंदिर है। कहा जाता है कि यह स्थान सम्राट विक्रमादित्य की तपोभूमि है। मंदिर के पीछे एक कोने में कुछ 'सिर' सिन्दूर चढ़े हुए रखे हैं। ये 'विक्रमादित्य के सिर' बतलाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि महान सम्राट विक्रम ने देवी को प्रसन्न करने के लिए प्रत्येक 12वें वर्ष में अपने हाथों से अपने मस्तक की बलि दे दी थी। उन्होंने ऐसा 11 बार किया लेकिन हर बार सिर वापस आ जाता था। 12वीं बार सिर नहीं आया तो समझा गया कि उनका शासन संपूर्ण हो गया। 

सांदीपनि आश्रम 

ऋषि सांदीपनि के आश्रम में श्रीकृष्ण ने भाई बलराम के साथ 64 दिन शिक्षा ली थी। इस दौरान उन्होंने 14 विद्याएं और 64 कलाएं सीखी थीं। उज्जैन से मिली शिक्षा ही कुरुक्षेत्र में गीता के रूप में श्रीकृष्ण के मुख से प्रकट हुई। इसके बाद ही वे योगेश्वर और जगद्गुरु भी कहलाए। यह परंपरा सांदीपनि आश्रम में आज भी चल रही है। पुजारी रूपम व्यास के अनुसार शहर के नागरिक ही नहीं देशभर से लोग अपने बच्चे को पहली बार स्कूल भेजने के पहले यहां आकर उनका विद्यारंभ संस्कार कराते हैं। गुरु पूर्णिमा पर भी यहां विद्यारंभ संस्कार के लिए दो सौ से ज्यादा लोग आते हैं। सालभर यहां आने वाले यात्रियों को भी जब इसकी जानकारी मिलती है तो वे बच्चों का विद्या-बुद्धि संस्कार कराने को उत्सुक हो जाते हैं।


(उज्जैन से हाल की बड़ी खबर)

24 / 11 / 2022

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 1 दिसंबर को उज्जैन पहुंचने वाली है. इस यात्रा के पहले महाकालेश्वर मंदिर समिति के नए नियम को लेकर कांग्रेस नेताओं ने अपना विरोध दर्ज करवाया. उन्होंने आरोप लगाया है कि महाकालेश्वर मंदिर समिति में राहुल गांधी की यात्रा को देखते हुए नया नियम बनाया गया, जिसका उद्देश्य ठीक नहीं है. 

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में समिति ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यह आदेश जारी किया कि अब नंदीहाल और गर्भ गृह में मोबाइल पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. इसके अलावा नंदीहाल और गर्भगृह में फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी नहीं हो सकेगी. इस आदेश का पालन भी शुरू हो गया. अब महाकालेश्वर मंदिर के गर्भ गृह में पूजा करने जाने वाले श्रद्धालुओं की बकायदा चेकिंग हो रही है. इसी नए नियम का कांग्रेस ने विरोध कर दिया. 

11 / 10 / 2022

पीएम मोदी आज करेंगे 'महाकाल लोक' का लोकार्पण, 40 देशों में होगा लाइव प्रसारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 11 अक्टूबर 2022 को उज्जैन में महाकाल लोक का उद्धाटन करेंगे। महाकाल लोक में कला और अध्यात्म का अनोखा मिश्रण दिखाई देता है। यहां भगवान शिव के साथ-साथ उनके पूरे परिवार की प्रतिमाओं को स्थापित किया गया है।

24 / 11 / 2022
ये पूरा कॉरिडोर 900 मीटर लंबा है. इस कॉरिडोर में 190 मूर्तियां हैं, जो भगवान शिव के अलग-अलग रूपों को दिखाती है. यहां दो भव्य प्रवेश द्वार- नंदी द्वार और पिनाकी द्वार बने हैं. इसमें त्रिशूल के डिजाइन के 108 स्तंभ हैं

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